ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै
ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै |
गरीब निवाजु गुसईआ मेरा माथै छत्रु धरै ||
जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै |
नीचहु ऊच करै मेरा गोबिन्दु काहू ते न डरै ||
नामदेव कबीरु तिलोचनु सधना सैनु तरै |
कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सभै सरै ||
कठिन शब्दार्थ
लाल- स्वामी कउनु- कौन
गरीब निवाजु- दीन-दुखियों पर कृपा करने वाला
गुसईआ- स्वामी
माथै छत्रु धरै- मस्तक पर स्वामी होने का मुकुट धारण करता है |
छोति- छुआछूत, अश्पृश्यता
जगत कऊ लागै- संसार के लोगों को लगती है |
ता पर तुहीं ढरै- उन पर द्रवित होता है
नीचहु ऊच करै- नीच को भी ऊँची पदवी प्रदान करता है
नामदेव- महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत, इन्होंने मराठी और हिन्दी दोनों भाषाओं में रचना की है |
तिलोचनु- एक प्रसिद्ध वैष्णव आचार्य, जो ज्ञानदेव और नामदेव के गुरु थे |
सधना- एक उच्च कोटी के संत जो नामदेव के समकालीन माने जाते हैं
सैनु- ये सभी प्रसिद्ध संत हैं, आदि ‘गुरुग्रंथ साहब’ में संगृहीत पद के आधार पर इन्हें रामानन्द का समकालीन माना जाता है |
हरीजीउ- हरि जी से
सभै सरे- सब कुछ संभव हो जाता है |
ऐसी
लाल तुझ बिनु कौनु करै |
गरीब निवाजु गुसईआ
मेरा माथै छत्रु
धरै ||
अर्थात -
रैदास अपने प्रभु की कृपालुता को स्वीकार करते हुए कहते हैं - हे प्रभु ! तुम्हारे बिना कौन ऐसा कृपालु है जो भक्त के लिए इतना बड़ा कार्य कर सके | तुम गरीबों पर तथा दीन दुखियों पर कृपा करने वाले हो |
जाकी
छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं
ढरै |
नीचहु ऊच
करै मेरा गोबिन्दु काहू ते न डरै
||
अर्थात -
तुम ही ऐसे कृपालु स्वामी हो जिसने मुझ जैसे अछूत और नीच के माथे पर राजाओं जैसा छत्र रख दिया, अर्थात तुम्हीं ने मुझे राजाओं जैसा सम्मान प्रदान किया | मैं वह अभागा हूँ जिसको छूने मात्र से सारे संसार को दोष लगता है, तब भी हे स्वामी ! तुमने मुझ पर असीम कृपा की | मुझ पर द्रवित हो गए | हे गोविंद ! तुमने मुझ जैसे नीच प्राणी को इतना उच्च सम्मान प्रदान किया | सचमुच तुम्हें किसी का भी भय नहीं है |
कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरीजीउ ते सभै सरै ||
अर्थात -
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ऐसी लाल तुझ बिनु कौन करे- रैदास प्रश्नोत्तर

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