सोमवार, 10 अगस्त 2020

ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै - रैदास

 ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै 

ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै |

गरीब निवाजु गुसईआ मेरा माथै छत्रु धरै ||

जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै |

नीचहु ऊच करै मेरा गोबिन्दु काहू ते न डरै ||

नामदेव कबीरु तिलोचनु सधना सैनु तरै |

कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सभै सरै || 


 

कठिन शब्दार्थ 

लाल- स्वामी                कउनु- कौन

गरीब निवाजु- दीन-दुखियों पर कृपा करने वाला

 गुसईआ-  स्वामी

 माथै छत्रु धरै-      मस्तक पर स्वामी होने का मुकुट धारण करता है | 

 छोति-      छुआछूत, अश्पृश्यता 

जगत कऊ लागै-  संसार के लोगों को लगती है |

ता पर तुहीं ढरै-  उन पर द्रवित होता है

नीचहु च करै-  नीच को भी ऊँची पदवी प्रदान करता है

नामदेव-   महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत, इन्होंने मराठी और हिन्दी दोनों भाषाओं में  रचना की है |

तिलोचनु-  एक प्रसिद्ध  वैष्णव आचार्य, जो ज्ञानदेव और नामदेव के गुरु थे |

सधना-   एक उच्च कोटी के संत जो नामदेव के समकालीन माने जाते हैं

सैनु-    ये सभी प्रसिद्ध संत हैं, आदि ‘गुरुग्रंथ साहब’ में संगृहीत पद के आधार पर इन्हें रामानन्द का समकालीन माना जाता है |

हरीजीउ-   हरि जी से 

सभै सरे-   सब कुछ संभव हो जाता है |


ऐसी लाल तुझ बिनु कौनु करै  |
गरीब
निवाजु  गुसईआ मेरा माथै छत्रु धरै  ||

अर्थात -  

    रैदास अपने प्रभु की कृपालुता को स्वीकार करते हुए कहते हैं - हे प्रभु ! तुम्हारे बिना कौन ऐसा कृपालु है जो भक्त के लिए इतना बड़ा कार्य कर सके | तुम गरीबों पर तथा दीन दुखियों पर कृपा करने वाले हो |


जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै |
नी
चहु करै मेरा गोबिन्दु काहू ते न डरै ||

अर्थात -   

  तुम ही ऐसे कृपालु स्वामी हो जिसने मुझ जैसे अछूत और नीच के माथे पर राजाओं जैसा छत्र रख दिया, अर्थात तुम्हीं ने मुझे राजाओं जैसा सम्मान प्रदान किया | मैं वह अभागा हूँ जिसको छूने मात्र से सारे संसार को दोष लगता है, तब भी हे स्वामी ! तुमने मुझ पर असीम कृपा की | मुझ पर द्रवित हो गए | हे गोविंद ! तुमने मुझ जैसे नीच प्राणी को इतना उच्च सम्मान प्रदान किया | सचमुच तुम्हें किसी का भी भय नहीं  है |

जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै |
नीचहु करै मेरा गोबिन्दु काहू ते न डरै ||
अर्थात 
       तुम ही ऐसे कृपालु स्वामी हो जिसने मुझ जैसे अछूत और नीच के माथे पर राजाओं जैसा छत्र रख दिया, अर्थात तुम्हीं ने मुझे राजाओं जैसा सम्मान प्रदान किया | मैं वह अभागा हूँ जिसको छूने मात्र से सारे संसार को दोष लगता है, तब भी हे स्वामी ! तुमने मुझ पर असीम कृपा की | मुझ पर द्रवित हो गए | हे गोविंद ! तुमने मुझ जैसे नीच प्राणी को इतना उच्च सम्मान प्रदान किया | सचमुच तुम्हें किसी का भी भय नहीं  है |

नामदेव कबीरु तिलोचनु सधना सैनु तरै |
कहि
रविदासु सुनहु रे संतहु हरीजीउ ते सभै सरै  || 

अर्थात -

    आपकी कृपा से नामदेव जैसे  छीपी, कबीर जैसे जुलाहे, त्रिलोचन जैसे सामान्य, सधना जैसे कसाई और सैन जैसे नाई संसार से तर गए | उन्हें ज्ञान प्राप्त हो गया | रविदास कहते हैं- हे संतो, सुनो ! हरी जी सब कुछ करने में समर्थ है | वे कुछ भी कर सकते हैं | 

 

निम्नांकित लिंक को क्लिक करके प्रस्तुत काव्य का स्व-मूल्यांकन करे। 

ऐसी लाल तुझ बिनु कौन करे- रैदास प्रश्नोत्तर

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