* समास *
‘समास’ शब्द का संधि विच्छेद होता है - सम्+आस = समास । ‘सम्’ का अर्थ है समान रूप से और ‘आस’ का अर्थ पास रखना | दो शब्दों को जोड़ने या पास में रखने की प्रक्रिया को ‘समास’ कहते है |
‘समास’ का अर्थ है पास
रखना, छोटा
करना | भाषा के
प्रयोग में सामासिक शब्दों के प्रयोग से संक्षिप्तता और शैली में उत्कृष्टता एवं
सटीकता आती है | उदाहरण के लिए, ‘राजा का महल’ कहने के स्थान पर ‘राजमहल’ कहना अधिक उपयुक्त है |
व्याख्या-
परस्पर संबंध रखने वाले दो या दो से अधिक
शब्दों के मेल से बने नए शब्द बनाने क्रिया को ‘समास’ कहते है |
उदाहरण –
रात और दिन = रात-दिन
दस हैं आनन(मुख)
जिसके = दशानन
समास-विग्रह
जब समस्त पदों को वापस पृथक्-पृथक् (अलग-अलग) किया जाता है तो उसे समास-विग्रह कहते हैं |
उदाहरण –
रात-दिन = रात और
दिन
दशानन = दस हैं
आनन(मुख) जिसके
समास में पद
समास रचना में
प्रायः दो पद होते हैं | पहले पद को ‘पूर्व पद’ और दूसरे पद को ‘उत्तर पद’ कहते हैं और समास से बने पद को ‘समस्त पद’ कहते हैं |
उदाहरण –
रात और दिन =
रात-दिन
रात- पूर्व पद है |
दिन- उत्तर पद है
दस हैं आनन(मुख)
जिसके = दशानन
दस- पूर्व पद है |
आनन – उत्तर पद है |
द्वंद्व समास
जहाँ समस्त पद के दोनों खंड समान स्तर के हों
तथा जिसमें ‘और’, ‘या’, ‘अथवा’ योजक का लोप हो, वहाँ द्वंद्व समास होता है |
उदाहरण –
रात-दिन = रात और दिन
भाई-बहन = भाई और बहन
तीन-चार = तीन या चार
धर्माधर्म = धर्म और अधर्म
राजा-रानी = राजा और रानी
सुबह-शाम = सुबह और शाम
सुख-दुख = सुख अथवा दुख
दो-चार = दो और चार
बहुव्रीहि समास
जहाँ पहला पद और दूसरा पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं,
वहाँ बहुव्रीहि समास
होता है|
जहाँ समस्त पद अपने अर्थ से अतिरिक्त
किसी अन्य अर्थ का द्योतन करता हो, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है|
उदाहरण -
दशानन – दस हैं आनन जिसके (रावण)
चन्द्रशेखर – चंद्र है शिखर पर जिसके (शंकर)
त्रिवेणी- तीन नदियों का संगम स्थल (प्रयागराज)
पीतांबर – पीले हैं वस्त्र जिसके (कृष्ण)
दूधमुँहा- मुँह में दूध है जिसके (छोटा
बच्चा)
त्रिनेत्र – तीन हैं नेत्र जिसके (शिव)
महात्मा – महान आत्मा हैं जिसकी
मुरलीधर- मुरली धारण करने वाला (कृष्ण)
कर्मधारय समास
जिस समास में एक पद विशेषण तथा दूसरा
विशेष्य हो अथवा एक पद उपमान और दूसरा पद उपमेय हो , वहाँ पर कर्मधारय समास होता है |
उदाहरण –
नीलकमल- नीला कमल
महाराजा – महान राजा
चंद्रमुख – चन्द्र के समान मुख
पीतांबर – पीला है जो अंबर
नृसिंह – नरों में सिंह के समान
महात्मा – महान है जो आत्मा
श्वेतांबर – श्वेत है जो वस्त्र
प्रधानाध्यापक – प्रधान है जो अध्यापक
गोबरगणेश
– गोबर से
बना गणेश
द्विगु समास
जहाँ समस्त पद में प्रथम पद संख्यावाचक
विशेषण हो, वहाँ ‘द्विगु समास’ होता है |
उदाहरण –
त्रिभुवन – तीन भुवनों का समूह
अष्टाध्यायी – आठ अध्यायों का समूह
चौपाई – चार पंक्तियों का समाहार
सप्ताह – सात दिनों का समाहार
चौमासा – चार मासों का समूह
नवग्रह – नव ग्रहों का समाहार
तिरंगा – तीन रंगों का समाहार
चौराहा – चार राहों का समाहार
दोपहर – दो पहरों का समाहार
अव्ययीभाव समास
जिस समास में पहला पद अव्यय हो, उसे ‘अव्ययीभाव समास’
कहते हैं |
उदाहरण
आजन्म –
जन्म से लेकर
आजीवन –
जीवन-पर्यंत / जीवन भर
आमरण –
मरण तक
निडर – ड़र
रहित
प्रतिदिन
– दिन-दिन
घर-घर –
प्रत्येक घर
भरपेट –
पेट भर कर
यथाशक्ति
– शक्ति
के अनुसार
प्रतिक्षण
– प्रत्येक क्षण
तत्पुरुष समास
जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है और
प्रथम पद गौण होता है तथा विग्रह करते समय बीच में परसर्ग(ने, का, के लिए,में, पर आदि) जोड़े जाते
हैं, वहाँ पर
तत्पुरुष समास बनता हैं |
उदाहरण –
पदप्राप्त – पद को प्राप्त
अकालपीड़ित – अकाल से पीड़ित
ग्रामगत – ग्राम को गया हुआ
वाग्दत्ता – वाणी द्वारा दत्त
गौशाला – गौ के लिए शाला
विद्यालय – विद्या के लिए आलय
अमृतधारा – अमृत की धारा
आनंदमग्न – आनंद में मग्न
अनादर – न आदर








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