रविवार, 9 अगस्त 2020

अग्निपथ काव्य - हरिवंशराय बच्चन

 अग्निपथ


हरिवंशराय बच्चन
कवि परिचय 

            हरिवंशराय बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में 27 नवंबर 1907 को हुआ | ‘बच्चन’ इनका माता-पिता द्वारा प्यार से लिया जानेवाला नाम थाजिसे इन्होंने अपना उपनाम बना लिया था बच्चन कुछ समय तक विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहने के बाद भारतीय विदेश सेवा में चले गए थे इस दौरान इन्होंने कई देशों का भ्रमण किया और मंच पर ओजस्वी वाणी में काव्यपाठ के लिए विख्यात हुए बच्चन की कविताएँ सहज और संवेदनशील हैं इनकी रचनाओं में व्यक्ति-वेदनाराष्ट्र-चेतना और जीवन-दर्शन के ढोंगसामाजिक असमानता और कुरीतियों पर व्यंग्य किया है कविता के अलावा बच्चन ने अपनी आत्मकथा भी लिखीजो हिन्दी गद्य की बेजोड़ कृति मानी जाती है |

        बच्चन की प्रमुख कृतियाँ हैं : मधुशालानिशा-निमंत्रणएकांत-संगीतमिलन-यामिनीआरती और अंगारेटूटती चट्टानेंरूप तरंगिणी (सभी कविता-संग्रह) और आत्मकथा के चार खंड : क्या भूलूँ क्या याद करूँनीड़ का निर्माण फिरबसेरे से दूरद्वार से सोपान तक | बच्चन साहित्य अकादमी पुरस्कारसोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार और सरस्वती सम्मान से सम्मानित हुए |

अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

वृक्ष हो भले खड़े, 

हों घने, हों बड़े, 

एक पत्र-छाँह भी माँग मत! माँग मत! माँग मत! 

अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! 

 शब्दार्थ- 

अग्निपथ- आग से भरा रास्ता, कठियानाइयों से भरा रास्ता 

घने- बहुत ज्यादा। 

पत्र- पत्ता। 

छायाँ- छाया।

अर्थ- 

     हरिवंशराय बच्चन कहते हैं- यह जीवन अग्नि भरे रास्ते के समान है इसमें कठिनाइयाँ ही कठिनाइयाँ हैसंघर्ष ही संघर्ष हैं | हे  मनुष्य ! तुम्हारे रास्ते में भले ही वृक्ष खड़े हों वे वृक्ष घने और बड़े होंकिन्तु तुम्हें उनसे एक पत्ता भर छाँह भी नहीं माँगनी चाहिए तुम्हें कठिनाइयों भरे रास्ते पर निरंतर संघर्ष करते हुए चलते चले जाना चाहिए यह जीवन अग्नि पथ के समान है इसकी कठिनाइयों का स्वीकार करना चाहिए | 

तू न थकेगा कभी! 

तू न थमेगा कभी!

तू न मुड़ेगा कभी! - कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ!

अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!

शब्दार्थ-        

शपथ- सौगंध, कसम 

अर्थ- 

    कवि मनुष्य को संबोधित करके कहता है- हे मनुष्य ! तेरे सामने कठिनाइयों से भरा संसार है परंतु तू इससे घबरा मत तू शपथ ले कि तू इस मार्ग पर निरंतर चलता रहेगा तू कभी कठिनाइयों से घबरा कर रुकेगा नहींअपनी चाल को रोकेगा नहीं और पीछे मुड़कर भागेगा  नहीं तेरे चारों ओर यह कठिनाइयों से भरा संसार हैं |


यह महान दृश्य है- 

चल रहा मनुष्य है 

अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ!

अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! 


   शब्दार्थ –

अश्रु- आँसू

स्वेद – पसीना                            

लथपथ – सना हुआ, भरा हुआ। 

आशय -

       कवि मनुष्य को संबोधित कराते हुए कहता है- हे मनुष्य!

 यह संसार आग भरे रास्ते के समान कठिन है। इस कठिन मार्ग 

पर सबसे सुंदर दृश्य यही हो सकता है कि मनुष्य कठिनाइयों को 

झेलते हुए निरंतर चल रहा है। कठिनाइयों को झेलते-झेलते उसकी 

आँखों से आँसू बह रह है, शरीर से पसीना निकाल रहा है और तन 

से खून बह रहा है। फिरत वह इसकी परवाह किए बिना निरंतर 

संघर्ष के रास्ते पर बढ़ा जा रहा है। सामने कठिनाइयों से भरा मार्ग 

है। फिर भी मनुष्य को चलते चले जाना है। 


निम्नांकित लिंक को क्लिक करके प्रस्तुत काव्य के ज्ञान का स्व-मूल्यांकन करे- 

'अग्निपथ' काव्य के प्रश्नोत्तर

त्श्ले

षणवाली कविताएँ भी लिखी हैं | राजनैतिक जी
हरिवंशराय बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में 27 नवंबर 1907 को हुआ | ‘बच्चन’ इनका माता-पिता द नाम था, जिसे
 इन्होंने अपना उपनाम बना लिया था | बच्चन कुछ समय तक विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहने के बाद भारतीय विदेश सेवा में चले गए थे | इस दौरान इन्होंने कई

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